
देश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में गिने जाने वाले KGMU (King George’s Medical University) से जुड़ा Love Jihad और Sexual Exploitation Case अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है।
Vishakha Committee की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद न सिर्फ़ आरोपी की भूमिका उजागर हुई है, बल्कि KGMU प्रशासन की कार्यशैली और जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
Vishakha Committee Report: आरोप सही, सवाल गहरे
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, Junior Resident Doctor Rameez Uddin को एक महिला रेजिडेंट डॉक्टर के साथ — Sexual exploitation, Blackmailing, Forced religious conversion का दबाव डालने का दोषी पाया गया है।
Report के सामने आते ही बहस तेज़ हो गई है कि अगर दोषी अंदर था, तो सिस्टम बाहर क्यों सो रहा था?
Aparna Yadav का गुस्सा: “महिला आयोग को Serious नहीं लिया जा रहा”
मामले को लेकर महिला आयोग की उपाध्यक्ष Aparna Yadav 9 जनवरी को KGMU पहुंचीं और Vice Chancellor से मिलने की कोशिश की।
लेकिन हैरानी की बात यह रही कि करीब 10 मिनट परिसर में मौजूद रहने के बावजूद उनसे मिलने कोई भी जिम्मेदार अधिकारी नहीं आया।
Aparna Yadav ने साफ़ कहा — “ऐसा लगता है कि महिला आयोग को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। यह रवैया दुर्भाग्यपूर्ण है और सोच को उजागर करता है।”
“Administration के Contact में था आरोपी”
Aparna Yadav ने एक और बड़ा दावा किया। उनके मुताबिक पीड़िता ने बताया था कि — उसने पूरी जानकारी Head of Department को दी इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई आरोपी प्रशासन के संपर्क में था और फिर भी दो दिन बाद फरार हो गया। जब शिकायत पहले थी, तो कार्रवाई बाद में क्यों नहीं?
जांच पर भी सवाल: “Commission क्यों गई?”
महिला आयोग की उपाध्यक्ष ने Vishakha Committee की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पीड़िता को एक senior doctor ने यह तक कह दिया — “आप महिला आयोग क्यों गईं?”
उनका दावा है कि किसी ‘व्यक्ति विशेष’ के इशारे पर आरोपी को बचाने की कोशिश की गई।

Statement बदलने का दबाव, सुरक्षा पर सवाल
Aparna Yadav ने कहा कि इस केस में बयान देने वाले लोगों पर statement बदलने का दबाव बनाया जा रहा है।
उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि महिलाओं से छेड़छाड़, जबरन धर्मांतरण और अन्य संवेदनशील घटनाएं KGMU में हो रही हैं, लेकिन प्रशासन पूरी तरह मौन है।
इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछले दो वर्षों से बिना लाइसेंस के Blood Bank संचालित हो रहा है।
सबसे पहले महिला आयोग पहुंची थी पीड़िता
गौर करने वाली बात यह है कि पीड़िता ने सबसे पहले अपनी आपबीती Aparna Yadav को ही सुनाई थी। महिला आयोग कार्यालय में हुई उसी मुलाकात के बाद मामला सार्वजनिक हुआ और Aparna Yadav ही पहली नेता थीं जिन्होंने press conference कर सख़्त कार्रवाई की मांग की।
यह मामला अब सिर्फ़ एक आरोपी तक सीमित नहीं है, बल्कि सवाल पूरे institutional accountability पर है।
जब report आ जाए, दोषी सामने हो — तो अब चुप्पी किसकी सुरक्षा कर रही है?
अब निगाहें KGMU प्रशासन की अगली कार्रवाई और जांच एजेंसियों के कदम पर टिकी हैं।
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